
उत्तराखंड : बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर विदेश जाने वाले पिथौरागढ़ के दो भाइयों के लिए रूस का सफर किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ। चिमिस्यानौला निवासी आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की ने आरोप लगाया है कि रोजगार और बेहतर वेतन का भरोसा देकर उन्हें रूस भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनके सामने उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत हालात खड़े हो गए। दोनों भाइयों का कहना है कि विदेश में नौकरी पाने के लिए उन्होंने करीब आठ लाख रुपये खर्च किए, लेकिन बदले में उन्हें न तो तय नौकरी मिली और न ही वादा किया गया वेतन।
पीड़ित भाइयों के अनुसार, उन्हें एक एजेंट के माध्यम से रूस में रोजगार का प्रस्ताव दिया गया था। उन्हें बताया गया था कि वहां अच्छी नौकरी मिलेगी, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगे। इसी भरोसे पर उन्होंने बड़ी रकम जुटाकर एजेंट को दी। दोनों भाइयों का आरोप है कि रोजगार दिलाने का आश्वासन देने वाला एजेंट दक्षिण अफ्रीका का रहने वाला था। एजेंट की बातों पर विश्वास कर वे रूस चले गए, लेकिन वहां पहुंचने के बाद वास्तविक स्थिति पूरी तरह अलग निकली।
आनंद और भूपेंद्र का कहना है कि रूस पहुंचने के बाद उन्हें वह काम नहीं मिला, जिसका वादा किया गया था। जिस नौकरी और वेतन की जानकारी उन्हें भारत में दी गई थी, वहां जाकर न तो वैसी व्यवस्था मिली और न ही भुगतान किया गया। इसके अलावा उन्हें कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग खर्चों और अन्य मदों के नाम पर लगातार पैसे काटे जाते रहे, जिससे उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ गईं।
दोनों भाइयों ने बताया कि विदेश जाने के पीछे उनका उद्देश्य परिवार को बेहतर जीवन देना था। उन्हें उम्मीद थी कि रूस में नौकरी मिलने के बाद वे अपनी आर्थिक स्थिति सुधार पाएंगे और परिवार की जिम्मेदारियों को अच्छे से निभा सकेंगे। लेकिन 97 दिनों का समय उनके लिए संघर्ष, परेशानी और चिंता में बीता। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेश में उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पीड़ितों के मुताबिक, विदेश जाने के लिए उन्होंने अपनी जमा पूंजी और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया था। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी उन्हें अपेक्षित रोजगार नहीं मिला, जिससे उनके सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को बड़े-बड़े सपने दिखाए जाते हैं, लेकिन कई बार वास्तविकता इसके उलट होती है। उन्होंने अन्य लोगों से भी अपील की है कि विदेश में रोजगार के लिए किसी भी एजेंट पर आंख बंद करके भरोसा न करें और पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही कदम उठाएं।
परिजनों का कहना है कि दोनों भाइयों ने घर की आर्थिक हालत सुधारने के उद्देश्य से यह जोखिम उठाया था। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश से अच्छी कमाई होगी और भविष्य बेहतर होगा, लेकिन अब स्थिति इसके विपरीत हो गई है। परिवार इस मामले में उचित कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहा है।
विदेशों में रोजगार के नाम पर ठगी के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। कई बार एजेंट आकर्षक नौकरी, ज्यादा वेतन और बेहतर सुविधाओं का लालच देकर युवाओं को विदेश भेज देते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि विदेश जाने से पहले संबंधित कंपनी, नौकरी का अनुबंध, वीजा प्रक्रिया और एजेंट की विश्वसनीयता की पूरी जांच करनी चाहिए।
आनंद और भूपेंद्र ने अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करना था, लेकिन गलत जानकारी और झूठे वादों के कारण उन्हें मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा। अब दोनों भाई चाहते हैं कि मामले की जांच हो और विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
यह घटना उन युवाओं के लिए भी एक चेतावनी है, जो बेहतर नौकरी और कमाई के लिए विदेश जाने का सपना देखते हैं। विदेश में रोजगार का अवसर जीवन बदल सकता है, लेकिन बिना सत्यापन और सही जानकारी के उठाया गया कदम बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।





